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السلام وعلیکم پیارے دوستو ❣️

भगवान के नाम पर कुछ दे दें बेटी ! दो दिन से कुछ नहीं खाया है, विनीता की नजर उस बूढ़ी अम्मा पर पड़ी तो वो सिहर गई, और सोचने लगी की अम्मा जी भिखारिन की तरह तो लग नहीं रही है, जरूर ये किसी अच्छे घर की रही होंगी, पर पता नहीं इस उम्र में भी इनको भीख क्यों मांगनी पड़ रही है, वो अपना पर्स खोलती कि इससे पहले ही ट्रेन चल पड़ी, लोकल ट्रेन से वो"...रोज इसी रास्ते से अपने ऑफिस जाती है, यूं तो स्टेशन पर काफी भीख मांगने वाले रहते हैं, पर इस बूढ़ी अम्मा को देखकर उसे विश्वास नहीं होता था कि ये भिखारिन है, पर जब भूख बर्दाश्त ना हो, और पास में खाने के लिए कुछ ना हो तो इंसान को कोई दूसरा चारा नजर नहीं आता"
है। विनीता पूरे रास्ते उस बूढ़ी अम्मा के बारे में सोचती रही, और दिन भर ऑफिस में पूरा हो गया, शाम को जब वो लौटी तो स्टेशन पर फिर से वो ही अम्मा दिखाई दी, विनीता उनके पास गई तो उनकी आंखें बुझी हुई थी, यूं लग रहा था कि जीने की कोई उम्मीद ही नहीं बची हो बस
..बस जिंदगी काटनी है इसलिए जीना है, उम्र करीब अस्सी साल, चेहरे पर अनुभवों की झुर्रियां, मैली कुचली साड़ी पर इन सबसे हटकर भी वो कुछ अलग लग रही थी। किसी अच्छे घर की महिला ही नजर आ रही थी, पता नहीं कौन सी ऐसी मजबूरी है..." विनीता ने वही खाने बेचने वाले से एक प्लेट ले ली, जिसमें चार पूड़ी और आलू की सब्जी थी, साथ ही उसने एक पैकेट छाछ भी ले ली ताकि गले में तरावट हो जायेगी। अम्मा, ये खाना खालो और छाछ पी लो आपका पेट भर जायेगा, खाना देखते ही उनकी आंखें चमक
 गई, उन्होंने आशीर्वाद दिया और खाने लग गई, विनीता आगे कुछ पूछती कि रोहित का फोन आ गया, कहां हो यार अब तक तो घर आ जाती हो, आज तो बड़ा समय लगा दिया। हां, आ रही हूं, वो मैं आकर बताती हूं और विनीता घर की ओर चल दी। तुम भी ना विनीता! स्टेशन पर तो ऐसे" कितने ही भिखारी होते हैं, रोज कितनों को खाना बांटोगी, आज दोगी तो कल भी मांगेंगे, फिर इन लोगों को रोज मांगने की आदत हो जाती है, काम-धाम तो कुछ ये करते नहीं है बस मुफ्त की रोटियां ही तोड़ते हैं, रोहित ने तेज स्वर में कहा"
 नहीं रोहित, ये आम भिखारिन की तरह नहीं थी, जरूर कोई मजबूरी होगी, इतनी लाचार लग रही थी कि तुमको भी देखकर दया आ जाती, मै कल अम्मा से बात करूंगी। अरे!! कल तो संडे है, कल क्यों जाओगी? तभी तो कल जाऊंगी, संडे है"ऑफिस जाने की जल्दी नहीं होगी और ना ही घर आने की। अगली सुबह विनीता स्टेशन की ओर चल दी, वहां पर उसने बूढ़ी अम्मा को ढूंढा पर वो कहीं दिखाई नहीं दी, तभी पूछने पर किसी नेबताया कि वो स्टेशन के बाहर जो बड़ा सा बरगद का पेड़ है वहीं पर उनका बसेरा है, तो विनीता वहीं चली गई। बरगद के पेड़ के निचे वो लेटी हुई थी, अम्मा मै आपके लिए नाश्ता लाई हूं, आज आप अंदर से बाहर नहीं आई? हां,
, बिटिया तबीयत ठीक नहीं लग रही है, हाथ-पैर भी जवाब दे चुके हैं, अब इस उम्र में कोई भी काम नहीं होता है, तो भीख मांगकर ही काम चला लेती हूं, वैसे कभी-कभी तेरे जैसे लोग भी आते हैं, मुफ्त में खाना दे जाते हैं। अम्मा, आप..." , आप कब से भीख मांग रही है? विनीता ने सवाल किया, विनीता के सवाल को सुनकर वो हैरान रह गई, और आंखों से आंसू बहने लगे बिटिया, भीख मांगना मुझे पसंद नहीं है पर क्या करूं? मजबूरी है, इस उम्र में हाथ-पांव चलते नहीं है, पेट की आग बुझाने के लिए खुद भी जलना पड़ता है। कभी नहीं सोचा था कि मेरी भी ये स्थिति होगी, मै तो स्टेशन पर भिखारियों को खुद भीख देती थी, खाना, कपड़ा, जरूरत का सामान बंटवाती थी। शहर के बीचों-बीच हमारा बड़ा सा मकान था, मकान में नौकर-चाकर थे, किसी रानी से मैं कम नहीं थी, घर पर दादी
दादी सास का हुकुम चलता था वो लाठी हाथ में लेकर सबकी बजाती थी, मजाल थी कि उनके हुकुम के बिना एक पत्ता भी हिल जाएं। घर में खाने-पीने की कोई कमी नहीं थी, हर आने-जाने वाले का घर में पूरा सम्मान किया जाता था, नौकर, माली, धोबी, मुनीम सबको त्योहार पल।  अच्छे कपड़े और पैसे, मिठाई देते थे। जब मेरी गोद भराई हुई थी तो पूरा गांव जीमणे आया था, देशी घी में पकवान बने थे, सबने बेटे का आशीर्वाद दिया और मुझे पहली संतान के रूप में आरव मिला। आरव की परवरिश में कोई कमी नहीं रही, डेढ़ साल बाद ही प्रशांत भी हो गया।"
दो बेटो की मां बनने का जो गर्व था वो मेरे सिर पर चढ़कर बोल रहा था, मै दादी सास और सास की प्यारी बहू थी जिसने खानदान को दो वारिस दिये थे हम हर त्योहार पर मंदिर और स्टेशन पर जाकर भिखारियों और जरूरतमंद को कपड़े
और खाना बंटवाते थे मेरे दोनों बेटे बड़े हो रहे थे, पति विरासत से मिला व्यापार संभाल रहे थे, घर में साक्षात अन्नपूर्णा का वास था, दोनों बेटों की अच्छे से परवरिश हो रही थी पर वो ज्यादा धन देखकर बिगड़ने लगे थे पढ़ाई से। जी चुराकर गलत संगत में फंस गए थे, दोस्तों और यारों में पैसा लुटाने लगे थे, घर में उनको डांटा जाता था, और मुझे भी सुनाया जाता था कि मै मां होकर बेटों का ध्यान नहीं रख पाती हूं। दादी सास पोतो की चिंता करते करते चली गई, और सास-ससुर का संसार से मन उठ गया
तो वो धार्मिक स्थल में जाकर रहने लगे, हमने समझाया कि दोनों की शादी तो कर जाओं, पर वो बोले जब पोत बहू आयें तो मुंह दिखाने आ जाना। अब इतने बड़े घर में हम चार लोग रह गये थे, अब पहले की तरह घर में कोई आता-जाता भी नहीं था। बेटे बड़े हो गए तो उनकी शादी की चिंता होने लगी, घर का व्यापार था पर अकेले मेरे पति संभालते थे, सोचा था बेटे हैं तो व्यापार अच्छा चलेगा पर बेटो को अपनी आवारागर्दी से ही फुर्सत नहीं मिल रही थी। गलत संगत में फंसकर जुए और शराब में धन लुटाये जा रहे थे और जो लोगपति के साथ व्यापार में जुड़े थे वो भी छल कपट करके धन बना रहे थे। शादी की उम्र निकली जा रही थी, हमने तय किया कि शादी कर देंगे ताकि हो सकता है बेटे शादी के बाद सुधर जाएं। परिवार का बड़ा नाम था, आखिर दोनों की शादी तय हो गई एक साथ ही घर में दो बहुएं आ गईं। अब लग रहा था कि लक्ष्मी घर आई है तो घर की स्थिति सुधर जायेगी। गरीब घरों से बेटियां लाये थे पर वो तो हमारे ही सिर पर चढ गईं, इतना धन देखकर दोनों को..." लालच आ गया और फालतू खर्च करने लगी। पहले तो हम बेटों से ही परेशान थे पर अब बहुएं भी नकचढ़ी आ गई थी, वो भी 
अय्याशी में कम नहीं थी, महंगे कपड़े जेवर खरीदने और सैर सपाटे में लग गई थी, मेरे पति व्यापार और मैं घर बार संभाल रही थी। दोनों देर तक उठती नहीं थी और रसोई में पैर नहीं रखती थी, मेरी हालत देखकर पति ने बेटों को कई बार समझाने की कोशिश की, पर वो समझे नहीं। ये"चिंता करने लगे और एक दिन अचानक इनकी तबीयत बिगड़ी और मुझे संसार में अकेला छोड़कर चले गये। इनके जाने के बाद भी बेटो की नींद नहीं खुली, दो-दो बच्चे हो गये, पर व्यापार संभाला नहीं गया और उसमें नुकसान होने लगा। एक दिन ऐसा आया कि कर्जदारों की भीड़ सिर पर आकर खड़ी हो गई। दोनों बेटों"को तब होश आया पर जब तक सब कुछ नष्ट हो चुका था। अब घर में लड़ाई झगड़े शुरू हो गये, दोनों बहुएं रोज मायके जाने की धमकी देती और घर में भी पैसों की भारी तंगी हो गई"...थी। वो कहते हैं ना विधवा मां सबकी आंखों में खटकती हैं, मै विधवा थी, कोई सहारा नहीं था, तो दोनों बेटे-बहू कुछ भी सुना देते थे। मेरे खाने-पीने में कटौती करने लगे थे, उन्हें लगता था कि अकेली इस मां का बहुत खर्चा हो जाता..."
है। अब रोज मुझे कोसा जाने लगा, मेरी वजह से दोनों कहीं ढंग से काम नहीं कर पा रहे हैं, घर में विधवा हो तो बरकत भी कम होती है, यही सोचकर बहुएं भी मुझे तानें देने लगी थी। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं? एक दिन आरव बोला मां आपको तीर्थ स्थल। की यात्रा करवा लाता हूं हो सकता है कुछ पुण्य मिलें और हमारे घर की स्थिति सुधर जाएं। मैं भी खुश थी पर थोडी आशंकित भी, आखिर ऐसी गरीबी में तीर्थयात्रा करवाने की क्या सूझी, फिर भगवान का ही फैसला मानकर मै तैयार हो गई। जिस तीर्थ स्थल पर जाना था,"
वहां से दो स्टेशन पहले आरव मेरे लिए पानी लेने को प्लेटफार्म पर उतरा था, पानी तो लाया नहीं और खुद भी नहीं आया, ट्रेन चलने लगी और मेरे पास एक रूपया भी नहीं था। स्टेशन जाकर गाड़ी रूक गई, मै नीचे उतरी और अपने
 बेटे को ढूंढ रही थी पर वो नहीं आया। स्टेशन पर ही सुबह से शाम हो गई, पास में पैसा भी नहीं था और भूख भी लग रही थी, कुछ नहीं सूझा एक दो दुकानदारों को अपनी आपबीती सुनाई पर किसी ने भी मुझे खाना नहीं दिया। मैंने कहा मुझे उधार दे दो, मेरा बेटा एक दो  दिन में लेने आ जायेगा, तो सब हंसने लगे। अम्मा, तुम बहुत भोली हो, तुम्हारा बेटा अब कभी नहीं आयेगा, वो तुम्हे यहां छोड़ गया है, तुम्हारे साथ रहना उसको भारी लग रहा था। मुझे विश्वास नहीं हुआ, नौ महीने जिस बेटे
 का भार उठाया, खून से सींचा आज उन्हीं बेटों को मां भारी लगने लगी थी। बस तब से बेटों का इंतजार करना छोड़ दिया है, अब तो यही स्टेशन पर भीख मांगकर गुजारा कर लेती हूं और भगवान का नाम जप लेती हूं। बूढ़ी अम्मा की कहानी सुनकर विनीता की आंखें भर आईं,"  सच है सब जानबूझकर भीख नहीं मांगते हैं, कुछ लोग मजबूर भी होते हैं, विनीता घर पर आ गई। रोहित बोला, अपनी बूढ़ी अम्मा से मिल आई? कोई कहानी सुना दी होगी। हां, रोहित ऐसी कहानी जो अंदर तक मन को झकझोर"
देती है, बेटो से मां का भार ना उठाया गया तो वो उन्हें स्टेशन पर छोड़कर चले गये। मैंने कहा बूढ़ी अम्मा आप अपने घर का पता दो पर वो मुकर गई। वो अब ना बेटों के साथ रहना चाहती है और ना ही उन्हें सजा दिलाना चाहती है। वापस
भी जाना नहीं चाहती, जब बेटों ने मेरा त्याग कर दिया तो मै क्यों उनसे मोह रखूं ? पत्थर की बन गई है, पर रोहित मुझे अम्मा का इस तरह स्टेशन पर भीख मांगना अच्छा नहीं लगता है, हम उनके लिए कुछ नहीं कर सकते? विनीता ने
अपने पति से पूछा, विनीता, हम क्या कर सकते हैं? हमारी अपनी नौकरियां हैं, अपनी बेटी है, जिसकी जिम्मेदारी हमारी है। कि हम उसे अच्छा जीवन दें। लेकिन रोहित हम अपनी बेटी को सब दे रहे हैं पर जो सबसे अमूल्य विरासत है वो नहीं दे पा रहे हैं। हमारी बेटी अकेलेपन से जूझ"
 जूझ रही है हम उसे समय नहीं दे पा रहे हैं और ना ही दादी-नानी का प्यार दे पा रहे हैं। रोहित, क्यों ना हम उन बूढ़ी अम्मा को गोद ले ले और अपने घर लेकर आ जाएं? उन्हें भी सहारा मिल जायेगा और हमारी बेटी को दादी-नानी का प्यार भी"मिल जायेगा। तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है, ऐसे ही रास्ते से किसी को भी उठाकर अपने घर में ले आऊं? किसी के बारे में कुछ पता तो होना चाहिए। फिर वो हमारी
कोई नहीं लगती है, ऐसे मदद करना चाहो तो कर सकती हो, पर उन्हें घर तो नहीं ला सकते हैं। अनजान, अजनबी लोगों का कोई भरोसा नहीं होता है। लेकिन रोहित तुम भी तो अनजान और अजनबी ही थे, जब तुम्हें अनाथालय"
से लाया गया था। विनीता की बात सुनकर रोहित चौंक गया, फिर वो झूठ भी तो नहीं बोल रही थी, वो भी अनाथ था, जाने क्यों उसके माता-पिता ने उसका त्याग कर दिया था? आज भी उसे अपने माता-पिता की याद आती है। जिन लोगों ने उसे गोद लिया था। उन्होंने बड़े लाड़ प्यार से पाला और आज उन्हीं के दम पर वो अपने पैरों पर खड़ा हुआ है। विनीता से शादी हुई और एक दिन दोनों उससे ही मिलने अपनी कार से आ रहे थे पर भीषण सड़क दुर्घटना में दोनों मारे गये और अपनी पोती का चेहरा भी"
 देख नहीं पाए। रोहित फिर से अनाथ हो गया था, ये तो विनीता ने उसे संभाला और हर कदम पर उसका साथ दिया। मुझे माफ कर दो विनीता, हम कल सुबह ही उन अम्मा के पास चलेंगे और उन्हें घर पर ले आयेंगे। रात को विनीता"
 बहुत खुश थी उसने अपनी बेटी को भी बताया था कि वो कल दादी को लेकर घर पर आयेंगे। सुबह उठकर तीनों ही स्टेशन चल दिए, विनीता की नजरें उन्हें ढूंढ रही थी, तभी दूसरी ओर बहुत भीड़ दिखी, वो भी भीड़ के अंदर देखने की कोशिश करने लगी। अंदर देखा तो मुंह से"
चीख निकल गई, अम्मा का शव पड़ा था, काफी दिनों से बीमार थी, समय पर इलाज ना मिलने के कारण मृत्यु हो गई। दो बेटों की मां भीख मांगने पर मजबूर हो गई थी और आज एक लावारिस की भांति स्टेशन पर पड़ी थी। विनीता
रोने लगी, बहुत मुश्किल से रोहित ने समझाया, लोग एक-एक करके जाने लगे, पर विनीता वहां से हिली नहीं, रोहित हम अम्मा को अपने साथ नहीं रख पायें, पर सम्मान से इनका अंतिम संस्कार तो कर ही सकते हैं, इनके बेटो को तो..."
खबर भी नहीं होगी कि आज उनकी मां इस दुनिया से चली गई है। रोहित ने पुलिस वालों से परमिशन ली और सम्मान से अम्मा का अंतिम संस्कार कर दिया। विनीता ने भीगी आंखों से उन्हें विदाई दी। दोस्तों, समाज में लडको की बड़ी...
चाह है कि बेटे होंगे तो माता-पिता को बुढ़ापे में सहारा मिलेगा, उनके हाथों से चिता को आग दी जायेगी, पर कलयुग में सब परिभाषा बदल गई है, बेटे जीते जी माता-पिता को छोड़ देते हैं, घर से बेघर कर देते हैं। और मज़बूरी बस उन्हें भीख मांग कर गुजारा करना पड़ता है, 
माता-पिता हमारे जीवन की वह नींव हैं, जो निस्वार्थ भाव से हमें बड़ा करते हैं। बुढ़ापे में उन्हें हमारे सहारे से ज्यादा हमारे प्यार और सम्मान की जरूरत होती है। आइए, हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि अपने माता-पिता को कभी अकेलापन महसूस नहीं होने देंगे, क्योंकि उनके आशीर्वाद में ही हमारी असली तरक्की छिपी है।"
दोस्तो:नोट: इस विचार का मकसद बेटे या बेटी में फर्क करना बिल्कुल नहीं है। बेटियाँ भी माता-पिता का पूरा ख्याल रखती हैं। यहाँ सिर्फ समाज की एक वास्तविक परिस्थिति और सच्चाई को बयां किया गया है।"
#emotional #explorepage #storytelling #post #positivevibes

2026 میں جو لوگ اے آئی (AI) نہیں جانتے — وہ پیچھے رہ جائیں گے اور یہ میں نہیں اعداد و شمار کہہ رہے ہیں

میں جانتا ہوں یہ سن کر تھوڑا سخت لگتا ہے لیکن کچھ سچائیاں ایسی ہوتی ہیں جنہیں نظرانداز کرنا بعد میں بہت مہنگا پڑتا ہے۔ میک کنزی گلوبل انسٹیٹیوٹ (McKinsey Global Institute) کی ایک رپورٹ (Report) کے مطابق 2030 تک دنیا بھر میں ستر فیصد (70%) کمپنیاں (Companies) اے آئی (AI) کو اپنے کاروبار (Business) میں شامل کر لیں گی۔ یعنی آنے والے چند سالوں میں ہر دفتر، ہر کاروبار اور ہر شعبے میں اے آئی (AI) موجود ہوگی۔ اب سوال یہ ہے کہ اس تبدیلی میں آپ کا کردار کیا ہوگا — استعمال کرنے والے کا یا پیچھے رہ جانے والے کا۔

لنکڈ اِن (LinkedIn) نے 2024 میں ایک تحقیق (Research) شائع کی جس میں بتایا گیا کہ اے آئی (AI) سکلز (Skills) رکھنے والے افراد کو نوکری ملنے کے امکانات عام افراد کے مقابلے میں پانچ گنا (5x) زیادہ ہیں۔ اسٹینفورڈ یونیورسٹی (Stanford University) کی ایک رپورٹ (Report) میں یہ بھی سامنے آیا کہ جو لوگ اے آئی (AI) ٹولز (Tools) کو اپنے کام میں شامل کرتے ہیں وہ اوسطاً چھیالیس فیصد (46%) زیادہ پیداواری (Productive) ہو جاتے ہیں۔ یعنی وہی کام، وہی وقت — لیکن نتیجہ دوگنا۔ اور سب سے چونکا دینے والی بات یہ ہے کہ گوگل (Google) کے سی ای او (CEO) سندر پچائی (Sundar Pichai) نے کہا کہ اے آئی (AI) انسانی تاریخ کی سب سے بڑی ٹیکنالوجیکل (Technological) تبدیلی ہے — آگ کی دریافت اور بجلی کی ایجاد سے بھی بڑی۔

اب میں آپ سے ایک ذاتی بات کرنا چاہتا ہوں۔ جب پاکستان اور انڈیا میں موبائل فون (Mobile Phone) آیا تو جن لوگوں نے جلدی اپنا لیا وہ آگے نکل گئے اور جو انتظار کرتے رہے وہ پیچھے رہ گئے۔ جب سوشل میڈیا (Social Media) آیا تو جن لوگوں نے پہلے سیکھا انہوں نے کاروبار (Business) بنائے، پیسے کمائے اور نام بنایا۔ اے آئی (AI) بھی بالکل اسی موڑ پر کھڑی ہے — فرق صرف یہ ہے کہ اس بار تبدیلی پہلے سے کہیں زیادہ تیز ہے۔ اور جو آج سیکھ لے گا کل وہی آگے ہوگا۔

کیا آپ اس تبدیلی کا حصہ بننا چاہتے ہیں؟ 💬 کمنٹ (Comment) میں صرف ہاں یا نہیں لکھیں — مجھے جاننا ہے کہ آپ کیا سوچتے ہیں۔ اگر یہ پوسٹ آپ کو جھنجھوڑ گئی تو ❤️ لائک (Like) کریں، کسی ایسے دوست کو 🔁 شیئر (Share) کریں جسے یہ جاننا چاہیے اور 🔔 فالو (Follow) کریں کیونکہ اگلی پوسٹ میں بتاؤں گا کہ اے آئی (AI) سیکھنے کی شروعات بالکل مفت (Free) میں کہاں سے کریں! 🚀

तीतर और तोते एक सूखते हुए जलस्रोत से अपनी प्यास बुझा रहे हैं। जहाँ कठोर मौसम और घटते जल स्रोतों के बावजूद जीवन अपनी पूरी नज़ाकत और खूबसूरती के साथ जारी है। कभी-कभी प्रकृति हमें याद दिलाती है कि पानी सिर्फ एक साधन नहीं, बल्कि हर जीव की साझा आवश्यकता है। ♥️ #naturelovers #birds नोट: यह तस्वीर कठिन मौसम में पानी की आवश्यकता को दर्शाती है।
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احسان اپنے بوڑھے والد کے ساتھ برآمدے میں بیٹھا تھا۔ شام کا وقت تھا۔ والد کرسی پر بیٹھے کہیں دور دیکھ رہے تھے، اور احسان موبائل ہاتھ میں لیے خاموش تھا۔
دونوں ایک دوسرے کے پاس تھے... مگر ایک دوسرے سے بہت دور۔کچھ دیر بعد احسان نے اپنے والد کی طرف دیکھا اور دل میں سوچا "کاش بابا اپنی پرانی باتیں سنایا کریں۔ اپنے بچپن کے قصے، اپنی جوانی کے واقعات، دادا ابو کی باتیں... کتنی گپ شپ ہوتی، کتنا کچھ سیکھنے کو ملتا۔"
ادھر والد بھی خاموش بیٹھے سوچ رہے تھے "کاش میرا بیٹا میرے پاس بیٹھ کر دو باتیں کر لیا کرے۔ میں اسے اپنے زمانے کی باتیں سناؤں، اپنی غلطیاں بتاؤں، اپنے تجربے بانٹوں..."
مگر دونوں کے دل کی بات دل میں ہی رہ گئی۔ ایک دن محلے کے ایک بزرگ نے احسان سے کہا "بیٹا! تمہارے والد ایک ایسی کتاب ہیں جو اب دوبارہ نہیں لکھی جائے گی۔ جو قصے، تجربے اور دعائیں ان کے سینے میں ہیں، وہ ان کے ساتھ ہی چلے جائیں گے اگر تم نے آج انہیں نہ سنا۔"
اس رات احسان اپنے والد کے پاس جا بیٹھا اور مسکرا کر بولا "بابا... آپ کے زمانے میں فلاں چیز کیسی ہوتی تھی؟"
بوڑھے والد کے چہرے پر اچانک رونق آ گئی۔ اور پھر کئی گھنٹے گزر گئے...
ایک سوال نے برسوں کی خاموشی توڑ دی تھی 😊
Asdullhshared fromArslan's post
اگر آپ اپنی زمین سے محبت کرتے ہیں تو آپ اس میں اعلیٰ معیار کی کاشت کاری کریں گے اگر آپ اپنے گھر سے محبت کرتے ہیں تو آپ اسے ایک الگ ہی انداز سے ترتیب دیں گےاگر آپ اپنے کام سے محبت کرتے ہیں تو آپ اس میں تخلیقی کمال پیدا کریں گےکیونکہ محبت ہی چیزوں کو ان کی قدر و قیمت بخشتی ہے اور یہی انسان کی زندگی میں موجود ہر چیز کی بنیاد اور ستون ہے 
Asdullhshared fromArslan's post
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